शिव - पार्वती के इस अद्भुत मंदिर में सादगी से शादी करवाती है रंजना रावत
संजय चौहान की कलम से

इन दिनों पूरे देश में रूद्रप्रयाग जनपद का त्रिजुगीनारायण मंदिर लोगों के मध्य चर्चा का केंद्र बना हुआ है क्योंकि देश के प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी और हीरा व्यापारी रसेल महेता की बेटी श्लोका मेहता की शादी इसी पौराणिक मंदिर मे होने की खबरों की अटकलें लगाई जा रही है। बीते दिंनो रिलायंस ग्रुप के कुछ अधिकारी इस मंदिर का मुआयना करने आए थे और एक दिन ठहर कर चले गए थे। प्रदेश सरकार त्रियुगी नारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर रही है तो ऐसे में इस हाईप्रोफाइल शादी की कोई रस्म इसे आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगी। और भविष्य मे त्रिजुगीनारायण वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप मे पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनायेगा।

किसान बिटिया से वेडिंग प्लानर के जरिए नई उम्मीदों को पंख लगाती केदार घाटी की रंजना रावत!

गढ़ माटी संगठन की संस्थापक उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जनपद के भीरी गाँव की रंजना रावत आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। रंजना नें मल्टी नेशनल कंपनी की अच्छी खासी नौकरी छोड़ अपने गाँव मे स्वरोजगार की अलख जगाई और फिर हजारों लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा। पूरे देश मे लोग रंजना को किसाण बिटिया के नाम से पहचानतें हैं। स्वरोजगार के बाद रंजना वेडिंग प्लानर के जरिए त्रिजुगीनारायण वेडिंग डेस्टिनेशन में पौराणिक रीति रिवाजों संग लोगों की शादियां कराने की नयी पहल शुरू कर रही है। बकौर रंजना अब तक उनके पास शादियों दर्जनों प्रस्ताव आ चुकें लेकिन फाइनल तीन हुये हैं जिनकी शादियां अक्टूबर माह से शुरू में होंगीं।

 

पौराणिक रीति रिवाज, परम्पराओ और गढ़वाल की लोकसंस्कृति के तले होंगी शादियां!

वेडिंग प्लानर रंजना रावत ने बताया की त्रिजुगीनारायण वेडिंग डेस्टिनेशन में जो भी शादियां होंगी वे विधि विधान, पौराणिक रीति रिवाज, परम्पराओ और गढ़वाल की लोकसंस्कृति को ध्यान में रखकर होंगी ताकि लोगों को विवाह की रस्मों और गढ़वाल की सांस्कृतिक विरासत के बारे मे जानकारी मिले।

परम्परागत वाध्य यंत्रों और मांगल गीत होंगे आकर्षण!

गढ माटी की रंजना रावत और नवेंदू रतूडी की मानें तो विवाह त्रिजुगीनारायण वेडिंग डेस्टिनेशन में होने वाली शादियों में पहाड़ के परम्परागत वाध्य यंत्र ढोल दमाऊ, मशकबीन से लेकर मंगलेर महिलाओं द्वारा गाये जाने वाले मांगल गीत आकर्षण का केंद्र होंगे जो लोगों को जरूर पंसद आयेंगे। हमारी कोशिश है की अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी देश दुनिया से रूबरू करवाया जाय। महिला नवजागरण समिति की शशि रतूड़ी जी व उनकी मांगल टीम इसमें हमारे सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं।

दिखावे की जगह सादगी पर रहेगा जोर!

त्रिजुगीनारायण वेडिंग डेस्टिनेशन में होने वाली शादियों में सबसे खास बात सादगी पर जोर रहेगा। आजकल शहरों में होने वाली शादियों मे दिखावे के लिए लाखों रूपये पानी की तरह बहाये जा रहे हैं जबकि त्रिजुगीनारायण वेडिंग डेस्टिनेशन में बेहद सादगी से विवाह संपन्न कराये जायेंगे।

शादी का पूरा बंदोबस्त करेगी गढ़माटी टीम! गढ़वाल के पारम्परिक भोजन की रहेगी धूम।

गढ़ माटी की पूरी टीम रंजना रावत, नवेंद्र रतूडी, अजीत पोरवल, दीपक नेगी, राजा बाजा फिल्मस के शिवेंदू रतूड़ी सहित अन्य लोग शादी का पूरा बंदोबस्त खाना पीने से लेकर ठहरने, फोटोग्राफी, मांगल टीम, पूजा सामग्री इत्यादि का बंदोबस्त खुद करेगी। जबकि शादी में गढ़वाल की पारम्परिक भोजन की रहेगी धूम।

त्रिजुगीनारायण मंदिर की ये है धार्मिक मान्यता!

मान्यताओं के अनुसार रूद्रप्रयाग जनपद के मैखंडा परगने में मंदाकिनी क्षेत्र के मंदाकिनी सोन आैर गंगा के मिलन स्थल त्रिजुगीनारायण मंदिर में शिवरात्रि के पवित्र दिन भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था। भगवान शिव के विवाह को लेकर कई तरह की कथाएं अलग-अलग धर्म ग्रंथों में प्रचलित हैं। माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह का प्रमाण है यहां जलने वाली अग्नि की ज्योति जो त्रेतायुग से निरंतर जल रही है। कहते हैं कि भगवान शिव ने माता पार्वती से इसी ज्योति के सामने विवाह के फेरे लिए थे। तब से अब तक यहां अनेकों जोड़े विवाह बंधन में बंधते हैं। लोगों का मानना है कि यहां शादी करने से दांपत्य जीवन सुख से व्यतीत होता है। इससे सौभाग्य की उम्र लंबी रहती है और जीवनसाथी के साथ बेहतर तालमेल बना रहता है।

मंदिर परिसर में मौजूद है कुंड!

इस मंदिर में स्थित कुंड के बारे में मान्यता है कि विवाह संस्कार कराने से पूर्व भगवान विष्णु ने इसी कुंड में स्नान किया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता-पार्वती और भगवान शिव के विवाह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई थी और भाई द्वारा बहन की शादी में की जाने वाली सभी रस्में भगवान विष्णु ने ही पूरी की थीं।

त्रेतायुग की जलती धूनी!

इस मंदिर में स्थित हवन कुंड में हर समय अग्नि जलती रहती है। इस अखंड ज्योति के बारे में कहा जाता है कि यह उसी समय से जल रही जब शिव-पार्वती के फेरे हुए थे। इस मंदिर में दर्शन करने आनेवाले भक्त इस कुंड की राख (भस्म) को अपने साथ प्रसाद रूप में घर ले जाते हैं और शुभ कार्यों के दौरान इसका टीका लगाते हैं।

शिव पार्वती के विवाह में सम्मिलित हुये थे ऋषि-मुनि!

त्रियुगीनारायण हिमावत की राजधानी थी। यहां शिव पार्वती के विवाह में समारोह में सभी संत-मुनियों ने भाग लिया था। विवाह स्थल के नियत स्थान को ब्रहम शिला कहा जाता है जो कि मंदिर के ठीक सामने स्थित है। विवाह से पहले सभी देवताओं ने यहां स्नान भी किया और इसलिए यहां तीन कुंड बने हैं जिन्हें रुद्रकुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्मा कुंड कहते हैं। इन तीनों कुंड में जल सरस्वती कुंड से आता है। सरस्वती कुंड का निर्माण विष्णु की नासिका से हुआ था और इसलिए ऐसी मान्यता है कि इन कुंड में स्नान से संतानहीनता से मुक्ति मिल जाती है।

वेडिंग प्लानर रंजना रावत से त्रिजुगीनारायण वेडिंग डेस्टिनेशन में होने वाली शादियों के विषय पर लंबी गुफ्तगु हुई तो रंजना का कहना था कि लोग अब शादी में दिखावे से अधिक सादगी पंसद कर रहे है। हमारे पास त्रिजुगीनारायण जैसा तीर्थ मौजूद है जहां खुद भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था। प्रदेश सरकार त्रियुगी नारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी और जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मंगेश घिल्डियाल जी का ये ड्रीम प्रोजेक्ट है कि त्रिजुगीनारायण को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विश्व में अपनी अलग पहचान बनाये। हमारी कोशिश है कि त्रियुगी नारायण वेडिंग डेस्टिनेशन के जरिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिले, स्थानीय लोगों को रोजगार और हमारी लोकसंस्कृति को नयी पहचान। आज ही हमने त्रियुगी नारायण वेडिंग डेस्टिनेशन सीरिज का पहला वीडियो लांच किया है। इस वीडियो को जरूर देखिएगा।

https://youtu.be/lwmKQ814D5k

उम्मीद है कि आपको भी ये बेहद पसंद आयेगा। आपसे अनुरोध है कि शादियों में दिखावे की जगह सादगी अपनाइये। आइये त्रियुगी नारायण वेडिंग डेस्टिनेशन मे आपका स्वागत है। अगर आपको भी रंजना रावत की वजह उनकी टीम की नयी पहल त्रियुगी नारायण वेडिंग डेस्टिनेशन पंसद आये तो शादियों को संपन्न कराने के लिए हिमालय की शांत वादियों में आ सकते हैं। त्रिजुगीनारायण मंदिर सोनप्रयाग से 12 किमी की दूरी पर स्थित है। जबकि रूद्रप्रयाग से लगभग 80 किमी की दूरी पर। तो फिर देर किस बात की ब्यो और बाराती संग चले आइये त्रियुगी नारायण वेडिंग डेस्टिनेशन…

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