मीना कुमारी

हिंदी सिनेमा की मशहूर और चर्चित अभिनेत्री मीना कुमारी आज ही के दिन जन्मी थी। बिना बोले अपनी एक छोटी से अदा से भी जादु चला देने वाली इस अभिनेत्री ने जितनी शोहरत पाई। असल जिंदगी में उतने ही दुख भी देखें।

गरीब परिवार में जन्मी मीरा कुमारी को उनके पिता ने पहले सड़क पर छोड़ दिया था। क्योंकि उनकी पहले से ही दो बेटियां थी और तीसरी को पालने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे लेकिन छोटी सी बच्ची की रोने की आवाज ने पिता को झकझोर दिया और वह उन्हें सड़क से उठाकर वापस घर ले आएं।

पैसे कमाने के लिए मीना कुमारी ने बाल कलाकार के रुप में काम किया। तब इनका नाम महजबीन बानो था। इनका नाम प्रोड्यूसर विजय भट्ट ने बदला। दरअसल बाल कलाकार के रुप में महजबीन बानों लगातार काम कर रही थी। प्रोड्यूसर विजय भट्ट को लगा कि ये नाम कुछ ठीक नहीं है और उन्होंने महजबीन को बेबी मीना कह कर बुलाना शुरू किया। बाद में बेबी मीना का नाम मीना कुमारी हो गया।

तलाक मिलने पर मीना ने वेश्या से की थी खुद की तुलना

मीना कुमारी की खूबसूरती और अदाकारी के कारण वह जल्द ही सुपरस्टार बन गई।  मीना बेस्‍ट एक्‍ट्रेस का फिल्‍म फेयर अवॉर्ड पाने वाली पहली अभिनेत्री थी। लेकिन उनकी शोहरत के कारण डायरेक्टर और  उनके पति कमाल अमरोही से रिश्ते खराब होते चले गए। एक दिन कमाल ने उन्हें गुस्से में तलाक ,तलाक और तलाक कह दिया।

मीना कुमारी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा क्योंकि वह बचपन से ही कमाल अमरोही से बेइंतहा प्यार करती थी। लेकिन कुछ सालों में ही कमाल को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह फिर से मीना कुमारी से निकाह करना चाहते हैं। लेकिन नियम के हिसाब से मीना को पहले किसी और के साथ निकाह करना था। कमाल ने अपने दोस्त और अभिनेत्री जीनत अमान के पिता अमान उल्ला खान से मीरा का निकाह करवाया। मीना कुमारी को  अपने ही पति के दोस्त के साथ हमबिस्तर होना पड़ा और इद्दत यानि मासिक धर्म के बाद अपने नए शौहर से तलाक लेकर वापस कमाल अमरोही से निकाह किया।

इस पूरे हादसे के बाद मीना कुमारी ने कहा था कि ‘जब मुझे धर्म के नाम पर, अपने जिस्म को दूसरे मर्द को सौंपना पड़ा, तो फिर मेरे और वेश्या में क्या फर्क रहा?’

इसके बाद मीना कुमारी काफी बीमार रहने लगी। उन्हें नींद भी नहीं आती थी। डॉक्टर ने नींद के लिए उन्हें एक पैक ब्राड़ी पीने की सलाह दी लेकिन ये सलाह मीना की जिंदगी पर भारी पड़ गई। एक पैग कब दो, तीन और चार हो गए पता ही नहीं चला। शायद यही वजह थी की वह सिर्फ 39 की उम्र में सन 1972 में दुनिया को अलविदा कह गई।

अपने करीब 33 साल के करियर में मीना कुमारी ने 90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। इनमें उनका सबसे उम्दा काम ‘साहब बीबी और ग़ुलाम’ (1962) में है। ‘पाकीज़ा’ (1972) भी, जो उनकी सबसे यादगार फिल्म है। इसके अलावा गुलज़ार के निर्देशन वाली ‘मेरे अपने’ (1971) है। इस फिल्म जैसा रोल मीना कुमारी को कोई दूजा नहीं है। उनकी फिल्म ‘मझली दीदी’ (1967) भी थी जो भारत की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर ऑस्कर अवॉर्ड्स में गई थी। उनकी ‘दिल अपना और प्रीत पराई’ (1960), ‘शारदा’ (1958), ‘मिस मैरी’ (1957) जैसी कई फिल्में भी हैं जो बेहतरीन है।

 

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