पत्तागोभी खाने से आठ साल की बच्ची के दिमाग में पहुंचे कीड़े के 100 अंडे

अगर आप भी पत्तागोभी की सब्जी खाने के शौकीन हैं तो इस खबर के बाद आप पत्तागोभी खाना बंद कर देंगे। दिल्ली में एक आठ साल की बच्ची के दिमाग में फीता कृमि यानी टेपवर्म ने 100 अंडे दिए है।

मीडिया रिपोर्टस की मानें तो बच्ची को पहले सिरदर्द की शिकायत थी, फिर मर्गी की दौरे आने लगी। घरवालों ने जब बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया, तब तक बच्ची बेहोश हो चुकी थी। डॉक्टर्स ने सीटी स्कैन कराया तो बच्ची के दिमाग में सफेद – सफेद स्पॉट दिखें। ये स्पॉट कुछ और नहीं बल्कि टेपवर्म के अंडे थे। ये अंडे कोई एक या दो की संख्या में नहीं बल्कि पूरे 100 हैं।

बच्ची के दिमाग पर अंडों का प्रेशर इस कदर बढ़ चुका था कि दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। यहां तक की बच्ची को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी।

पत्तागोभी से टेपवर्न कैसे पहुंचा दिमाग में

आए दिन घरों में पत्तागोभी की सब्जी बनती है। पत्तागोभी के अंदर टेपवर्न नाम का कीड़ा पाया जाता है। यह काफी अंदर तक छुपा होता है और आसानी से दिखाई नहीं देता है। लोग ऐसे ही सब्जी को धोकर बना देते हैं। पत्तागोभी को ठीक तरह से पकाया भी नहीं जाता है। अच्छे स्वाद के लिए सब्जी को थोड़ी कच्चा ही रखा जाता है। ऐसे में कीड़ा मरता नहीं है और खाने के साथ हमारे पेट में चला जाता है। पेट से ब्लड़ के जरिए हमारे शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंच जाता है।

मिर्गी का प्रमुख कारण भी है टेपवर्न

भारत में मिर्गी का प्रमुख कारण भी टेपवर्न है। भारत में टेपवर्म का संक्रमण बहुत ही सामान्य है। क़रीब 12 लाख लोग न्यूरोसिस्टिसेरसोसिस से पीड़ित हैं, जो मिर्गी के दौरों का एक प्रमुख कारण है.”

टेपवर्म यानी फीका कृमि कीड़ा एक तरह का पैरासाइट है। ये अपने पोषण के लिए दूसरों पर आश्रित रहने वाला जीव है। इसलिए ये शरीर के अंदर पाया जाता है, ताकि उसे खाना मिल सके। इसमें रीढ़ की हड्डी नहीं होती है। इसकी 5000 से ज़्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। ये एक मिमी से 15 मीटर तक लंबे हो सकते हैं। कई बार इसका सिर्फ़ एक ही आश्रय होता है तो कई बार एक से अधिक। इसका शरीर खंडों में बंटा होता है। इसके शरीर में हुक के जैसी संरचनाएं होती हैं जिससे ये अपने आश्रयदाता के अंग से चिपका रहता है। शरीर पर मौजूद क्यूटिकिल की मदद से यह अपना भोजन लेता है। यह पचाया भोजन ही लेते हैं क्योंकि इनमें पाचन-तंत्र नहीं होता है।

टेपवर्म का शरीर तक पहुंचने का मुख्य कारण

डॉक्टर कहते हैं कि जब किसी सब्जी को ठीक तरह से धोया नहीं जाता है और अधपका ही खा लिया जाता है तो उसमें मौजूद टेपवर्म या कीड़े मरते नहीं हैं और खाने के जरिए शरीर तक पहुंच जाते हैं। टेपवर्म अधपका बीफ खाने से, अधपकी या कच्ची मछली के सेवन से शरीर में पहुंचता है। गंदे पानी या गंदी मिट्टी में उगने वाली सब्जियों में भी ये पाए जाते हैं। इससे बचने के लिए खासतौर पर गोभी, पत्तागोभी और पालक को सही तरीके से धोकर अच्छी तरह पकाना चाहिए।

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