फूलन देवी

फूलन देवी, जिसे मीडिया और सिनेमा ने बैंडिट क्वीन नाम दिया। वह खुद को बागी कहती थी। जिसे मशहूर टाइम मैगज़ीन ने विश्व की 16 विद्रोही महिलाओं में चौथे पायदान पर जगह दी थी। ये महिला थी तो एक आम महिला लेकिन जिस तरह से फूलन देवी ने अपने आप पर हुए अत्याचारों का बदला लिया, उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। 25 जुलाई 2001 को यानी आज ही के दिन फूलन देवी की हत्या कर दी गई थी।

बचपन से ही थे तीखे तेवर

10 अगस्त 1963 में यूपी के जालौन में जन्मी फूलन देवी बचपन से ही विद्रोही स्वभाव की थी। इनका जन्म एक दलित परिवार में हुआ था। बचपन से ही मां से सुना था कि चाचा ने उनकी जमीन हड़प रखी है। मात्र 10 साल की उम्र में अपनी जमीन वापस पाने के लिए अपने चाचा से भिड़ गई। वहीं खेत में धरने पर बैठ गई लेकिन चचेरे भाई ने फूलन देवी के पत्थर मार दिया। इसका नतीजा ये हुआ कि घरवालों ने कम उम्र में ही फूलन की शादी उससे 30 – 40 साल बड़े आदमी से कर दी। पहले अधेड़ पति ने बलात्कार किया। कुछ साल किसी तरह काटने के बाद एक दिन फूलन अपने मायके भाग आई लेकिन भाई ने वापस ससुराल भेज दिया। जब तक फूलन ससुराल पहुंची, तब तक उनका पति दूसरी बीवी ले आया था। पति और सौतन ने फूलन को खूब खरी – खोटी सुनाई। ये वो दिन था जब फूलन देवी की जिंदगी में एक नया मोड़ आया। इसके बाद फूलन अपने पति का घर छोड़ आयी।

पति के छोड़ने के बाद डाकूओं से हुई मुलाकात

पति का घर छोड़ने के बाद फूलन का उठना – बैठना कुछ डाकूओं से होने लगा। हालांकि इस बात की कहीं पुष्टि नहीं है कि फूलन देवी अपनी मर्जी से डाकूओं के संपर्क में आई या उन्हें किड़नेप कर लिया गया था लेकिन अपनी आत्मकथा में फूलन देवी ने लिखा था कि शायद किस्मत को यही मंजूर था। इन डाकूओं के गैंग के सरदार बाबू गुजर के मन में फूलन के लिए प्रेम के अंकुर फूटने लगे और इस बात को लेकर गैंग के सदस्य विक्रम मल्लाह ने बाबू गुजर को मारकर सरदार बन गया। अब फूलन विक्रम के साथ रहने लगी।

3 हफ्ते तक गैंगरेप और 22 ठाकुरों से लिया बदला

बाबू गुजर की मौत के बाद ठाकुरों के एक गैंग ने विक्रम मल्लाह के गैंग पर हमला बोल दिया। ये गैंगै बाबू की मौत से नाराज थे और इसकी वजह फूलन को मानते थे। दोनों गुटों में लड़ाई हुई और विक्रम मारा गया। ठाकुरों का गैंग फूलन देवी का अपहरण कर लाया और यहां तीन हफ्ते तक फूलन के साथ बलात्कार किया। हालांकि मालासेन द्वारा फूलन देवी पर लिखी किताब में इस बात का जिक्र नहीं है। फूलन ने यही कहा कि ठाकुरों ने उनका बहुत मजाक उड़ाया लेकिन बैंडिट क्वीन फिल्म में ये दृश्य दिखाए गए हैं। शायद एक औरत के रुप में फूलन बलात्कार शब्द को कभी स्वीकार नहीं करना चाहती थी। ठाकुरों के चुंगल से छूटने के बाद फूलन डाकूओं की गैंग में शामिल हो गई। 1981 में फूलन बेइमई गांव लौटी। यहां उन्होंने दो लोगों को पहचान लिया, जिन्होंने उनका बलात्कार किया था। बाकी के बारे में पूछने पर किसी ने कुछ नहीं बताया। फूलन ने 22 ठाकुरों को गांव से निकाल कर गोली से भून डाला।

आत्मसमर्पण, जेल और राजनीति में एंट्री

इस घटना के बाद से फूलन को खूंखार डकैत मान लिया गया था। मीडिया ने फूलन को नया नाम दिया था बैंडिट क्वीन। इस घटना के बाद सियासत में भी जबरदस्त भूचाल आया। यूपी के तात्कालीन सीएम वी. पी. सिंह को रिजाइन करना पड़ा।

इसके बाद भिंड के एसपी राजेन्द्र चतुर्वेदी लगातार फूलन के गैंग से बात कर रहे थे। दो साल बाद इनकी बात को मानते हुए फूलन देवी ने आत्मसमर्पम किया। उनपर 22 हत्या, 30 डकैती और 18 अपहरण के चार्जेज लगे। 11 साल तक जेल में रहने के बाद फूलन देवी की राजनीति में एंट्री हुई। 1993 में मुलायम सरकार ने फूलन पर लगे सारे आरोप वापिस ले लिए, राजनैतिक रुप से ये बहुत बड़ा फैसला था लेकिन इस फैसले ने फूलन देवी को राजनीति में एंट्री करवा दी।  1994 में जेल से छूटने के बाद फूलन देवी ने उमेद सिंह से शादी की। 1996 में सपा पार्टी से ही फूलन ने चुनाव लड़ा और जीत गई। वह मिर्जापुर से सांसद बन गई। जंगलों मे घूमने वाली फूलन अब दिल्ली के बंगले में रहने लगी। 25 जुलाई 2001 को फूलन देवी से मिलने शेर राणा आया। वह उनकी एकलव्य सेना में शामिल होना चाहता था। फूलन देवी ने शेर राणा को खीर खिलाई लेकिन शेर राणा ने घर के गेट पर फूलन देवी को गोली मार दी। शेर राणा का कहना था कि उन्होंने 22 ठाकुरों की मौत का बदला लिया है। 14 अगस्त 2014 को दिल्ली की एक अदालत ने शेर राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

मात्र 38 साल की उम्र में फूलन देवी भारतीय समाज की कई सारी बुराईयों को समेटे हुए दुनिया को अलविदा कह गई।

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